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रविवार, 7 सितंबर 2025
रविवार, 24 अगस्त 2025
Class 7th Science Chapter 1_ 50MCQ
क्लास 7th Science Chapter 2 Objective Question Answer
📘 प्रश्न 1 से 25 (उत्तर सहित)
1. मनुष्य में भोजन की पाचन क्रिया कहाँ प्रारंभ होती है?
(A) आमाशय
(B) मुँह ✅
(C) छोटी आँत
(D) बड़ी आँत
2. दाँतों द्वारा भोजन को चबाना कहलाता है:
(A) रासायनिक पाचन
(B) शारीरिक पाचन ✅
(C) निष्कासन
(D) अवशोषण
3. मानव की पाचन नली में सबसे लंबा भाग कौन-सा है?
(A) आमाशय
(B) छोटी आँत ✅
(C) बड़ी आँत
(D) मुँह
4. अमीबा भोजन कैसे प्राप्त करता है?
(A) पंजों से
(B) झिल्ली द्वारा
(C) स्यूडोपोडिया द्वारा ✅
(D) श्लेष्मा द्वारा
5. अमीबा किस प्रकार का जीव है?
(A) बहुकोशिकीय
(B) एककोशिकीय ✅
(C) वायरस
(D) कवक
6. पेट में पाचन के लिए कौन-सा रस आवश्यक होता है?
(A) पित्त रस
(B) जठर रस ✅
(C) लार
(D) श्लेष्मा
7. मानव आमाशय का मुख्य कार्य क्या है?
(A) अवशोषण
(B) चबाना
(C) भोजन का रासायनिक पाचन ✅
(D) मल उत्सर्जन
8. पित्त रस का निर्माण कौन करता है?
(A) यकृत ✅
(B) आमाशय
(C) अग्न्याशय
(D) आँत
9. लार में कौन-सा एंजाइम होता है?
(A) ट्रिप्सिन
(B) अमाइलेज ✅
(C) पेप्सिन
(D) लाइपेस
10. दूध पीने वाले शिशुओं में मुख्य पाचन एंजाइम है:
(A) पित्त रस
(B) रेनिन ✅
(C) पित्त लवण
(D) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
11. गाय में पाचन की प्रक्रिया विशेष होती है क्योंकि उसमें होता है:
(A) दो पेट
(B) तीन पेट
(C) चार पेट ✅
(D) एक पेट
12. पशु जो केवल पौधे खाते हैं, उन्हें क्या कहते हैं?
(A) मांसाहारी
(B) सर्वाहारी
(C) शाकाहारी ✅
(D) परपोषी
13. भोजन का अन्तिम अवशोषण कहाँ होता है?
(A) आमाशय
(B) बड़ी आँत
(C) छोटी आँत ✅
(D) मुँह
14. परपोषी जीव कौन से होते हैं?
(A) जो मृत जीव खाते हैं
(B) जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं
(C) जो दूसरों पर निर्भर रहते हैं ✅
(D) जो केवल जल पीते हैं
15. मानव शरीर में पाचन रस उत्पन्न करने वाला अंग कौन-सा है?
(A) त्वचा
(B) अग्न्याशय ✅
(C) हृदय
(D) मस्तिष्क
16. पित्त रस का संचय कहाँ होता है?
(A) यकृत
(B) आमाशय
(C) पित्ताशय ✅
(D) आँत
17. बड़ी आँत का कार्य है:
(A) पाचन
(B) जल का अवशोषण ✅
(C) भोजन चबाना
(D) लार स्रवण
18. कौन-सा जीव रुमिनेंट है?
(A) कुत्ता
(B) बिल्ली
(C) गाय ✅
(D) मेंढक
19. मनुष्य के दाँतों की संख्या कितनी होती है?
(A) 28
(B) 30
(C) 32 ✅
(D) 36
20. जठर रस में कौन-सा अम्ल होता है?
(A) सल्फ्यूरिक अम्ल
(B) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ✅
(C) नाइट्रिक अम्ल
(D) कार्बोनिक अम्ल
21. अमीबा में भोजन ग्रहण और उत्सर्जन किसके द्वारा होता है?
(A) आँख
(B) मुँह
(C) स्यूडोपोडिया ✅
(D) लार
22. कौन-सा अंग यकृत से जुड़ा होता है?
(A) अग्न्याशय
(B) आमाशय
(C) पित्ताशय ✅
(D) छोटी आँत
23. प्रोटीन का पाचन प्रारंभ होता है:
(A) मुँह
(B) आमाशय ✅
(C) बड़ी आँत
(D) लार ग्रंथि
24. विटामिन्स और खनिजों का पाचन कहाँ होता है?
(A) मुँह में
(B) आँतों में
(C) नहीं होता ✅
(D) आमाशय में
25. मनुष्य में मल उत्सर्जन कहाँ से होता है?
(A) छोटी आँत
(B) बड़ी आँत
(C) गुदा ✅
(D) आमाशय
📘 प्रश्न 26 से 50 (उत्तर सहित)
26. भोजन का तरल रूप में परिवर्तन किसके द्वारा होता है?
(A) चबाने से
(B) जल पीने से
(C) पाचन रसों द्वारा ✅
(D) मांसपेशियों से
27. अमीबा में भोजन का पाचन कहाँ होता है?
(A) कोशिका झिल्ली में
(B) भोजन रसिका में ✅
(C) मुँह में
(D) गुदा में
28. अमीबा में भोजन लेने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
(A) विषाक्तन
(B) अंतर्ग्रहण ✅
(C) उत्सर्जन
(D) अपोषण
29. कौन-सा पाचन रस वसा का पाचन करता है?
(A) पित्त रस ✅
(B) लार
(C) पेप्सिन
(D) अमाइलेज
30. आमाशय में कौन-सा एंजाइम पाया जाता है?
(A) पेप्सिन ✅
(B) ट्रिप्सिन
(C) अमाइलेज
(D) लाइपेस
31. मल का निष्कासन कहलाता है:
(A) अंतर्ग्रहण
(B) अवशोषण
(C) निष्कासन ✅
(D) पाचन
32. गाय के जठर का प्रथम भाग क्या कहलाता है?
(A) रेटिकुलम
(B) ओमासम
(C) रुमेन ✅
(D) एबोमासम
33. मनुष्यों में भोजन की नली को क्या कहते हैं?
(A) आमाशय
(B) ग्रासनली ✅
(C) गुदा
(D) पाचन ग्रंथि
34. पाचन तंत्र में अग्न्याशय का कार्य है:
(A) पित्त बनाना
(B) लार बनाना
(C) पाचन रस बनाना ✅
(D) मल बनाना
35. दाँतों की देखभाल में कौन-सी बात जरूरी है?
(A) दाँत न धोना
(B) मीठा खाना
(C) दाँतों को नियमित साफ़ करना ✅
(D) ठंडा पानी पीना
36. छोटे बच्चों में कौन-से दाँत पहले आते हैं?
(A) स्थायी
(B) दूध के दाँत ✅
(C) मोलर
(D) प्रीमोलर
37. पाचन तंत्र का अंतिम भाग है:
(A) बड़ी आँत
(B) छोटी आँत
(C) गुदा ✅
(D) आमाशय
38. मुँह में भोजन के साथ सबसे पहले कौन-सा रस मिश्रित होता है?
(A) पित्त रस
(B) लार ✅
(C) आमाशयी रस
(D) आँत रस
39. अमीबा की आकृति कैसी होती है?
(A) गोल
(B) निश्चित
(C) अनियमित ✅
(D) त्रिकोणीय
40. पित्त रस वसा को तोड़कर बनाता है:
(A) अम्ल
(B) प्रोटीन
(C) सूक्ष्म बूंदें ✅
(D) कार्बोहाइड्रेट
41. पाचन के बाद पोषक तत्व कहाँ अवशोषित होते हैं?
(A) बड़ी आँत
(B) छोटी आँत ✅
(C) आमाशय
(D) मुँह
42. पाचन तंत्र में भोजन को आगे बढ़ाने में कौन मदद करता है?
(A) गुरुत्व बल
(B) दाँत
(C) लार
(D) मांसपेशियों की लहरदार गति ✅
43. मनुष्य के पाचन तंत्र में सबसे बड़ी ग्रंथि है:
(A) आमाशय
(B) अग्न्याशय
(C) यकृत ✅
(D) छोटी आँत
44. पेप्सिन एंजाइम किसके पाचन में सहायक है?
(A) वसा
(B) कार्बोहाइड्रेट
(C) प्रोटीन ✅
(D) जल
45. ट्रिप्सिन किस अंग से स्रवित होता है?
(A) अग्न्याशय ✅
(B) यकृत
(C) बड़ी आँत
(D) पित्ताशय
46. वसा के पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम है:
(A) पेप्सिन
(B) ट्रिप्सिन
(C) लाइपेस ✅
(D) अमाइलेज
47. कार्बोहाइड्रेट का पाचन किससे शुरू होता है?
(A) पेप्सिन
(B) ट्रिप्सिन
(C) अमाइलेज ✅
(D) रेनिन
48. प्रोटीन के पाचन
में कौन भाग नहीं लेता?
(A) पेप्सिन
(B) ट्रिप्सिन
(C) लार ✅
(D) अग्न्याशय रस
49. मनुष्य में जल का अवशोषण मुख्यतः कहाँ होता है?
(A) छोटी आँत
(B) आमाशय
(C) बड़ी आँत ✅
(D) मुँह
50. भोजन को शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाने वाली प्रक्रिया है:
(A) पाचन
(B) अवशोषण
(C) परिसंचरण ✅
(D) निष्कासन
शनिवार, 23 अगस्त 2025
कांग्रेस और भारत की आजादी में इसका योगदान
कांग्रेस क्या है?
👉कांग्रेस भारत की एक राजनीतिक पार्टी है।
इसका पूरा नाम है – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress – INC)।
संक्षिप्त जानकारी :
1. स्थापना – कांग्रेस की स्थापना 28 दिसम्बर 1885 ई. को बंबई (मुंबई) में हुई थी।
2. संस्थापक – ए. ओ. ह्यूम (A.O. Hume), जो एक ब्रिटिश अधिकारी थे।
3. उद्देश्य (शुरुआत में) –
👉भारतीयों को एक राजनीतिक मंच पर लाना।
👉अंग्रेज सरकार के सामने सुधारों की माँग रखना।
👉भारतीयों को प्रशासन में भागीदारी दिलाना।
4. स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका –
👉कांग्रेस ने धीरे-धीरे आज़ादी की लड़ाई को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया।
👉1905 के बाद से कांग्रेस उग्र और नरम दल में बँटी।
👉महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन चलाए गए।
👉अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली।
5. आज की स्थिति –
👉आज भी कांग्रेस भारत की प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों में से एक है।
👉स्वतंत्र भारत में लंबे समय तक यह सत्ता में रही।
👉देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, फिर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी आदि इसी पार्टी से थे।
संक्षेप में –
👉कांग्रेस वह पार्टी है जिसने भारत को अंग्रेज़ों से स्वतंत्र कराने में सबसे बड़ा योगदान दिया और आज भी भारतीय राजनीति में सक्रिय है।
🇮🇳 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
स्थापना:-
👉भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई।
👉इसके संस्थापक ए.ओ. ह्यूम (A.O. Hume) थे।
👉पहला अधिवेशन बंबई (मुंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुआ।
👉पहले अध्यक्ष डब्ल्यू. सी. बनर्जी (W.C. Banerjee) थे।
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उद्देश्य
1. भारतीयों को एक साझा राजनीतिक मंच देना।
2. ब्रिटिश सरकार से सुधारों की माँग करना।
3. शिक्षित वर्ग को राजनीति से जोड़ना।
4. धीरे-धीरे स्वराज्य की दिशा में आगे बढ़ना।
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कांग्रेस के प्रमुख चरण
1. प्रारंभिक चरण (1885 – 1905) – नरमपंथी युग
नेता : दादा भाई नौरोजी, गोपालकृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता।
नीति : प्रार्थना, निवेदन और सुधार।
माँगें : प्रशासनिक सुधार, नौकरियों में भारतीयों को स्थान, करों में कमी।
👉इस दौर को "निवेदन काल" भी कहा जाता है।
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2. गरम दल का उदय (1905 – 1919)
नेता : बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल।
नीति : “स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है” – तिलक।
आंदोलन : बहिष्कार, स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा।
👉1907 में सूरत अधिवेशन में नरम दल और गरम दल का टकराव हुआ।
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3. गांधी युग (1919 – 1947)
👉1919 में जलियाँवाला बाग हत्याकांड के बाद कांग्रेस का स्वरूप बदला।
👉महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने अहिंसात्मक आंदोलनों की शुरुआत की।
प्रमुख आंदोलन
1. असहयोग आंदोलन (1920-22)
2. सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34)
3. भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
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प्रमुख अधिवेशन और उनके महत्व
1. 1885 (बंबई) – प्रथम अधिवेशन, अध्यक्ष डब्ल्यू. सी. बनर्जी।
2. 1906 (कलकत्ता) – दादा भाई नौरोजी ने “स्वराज” को कांग्रेस का लक्ष्य बताया।
3. 1916 (लखनऊ) – कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता (लखनऊ पैक्ट)।
4. 1929 (लाहौर) – जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता, “पूर्ण स्वराज्य” का प्रस्ताव पारित।
5. 1931 (कराची) – मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति का प्रस्ताव।
6. 1942 (बंबई) – भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव।
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कांग्रेस की उपलब्धियाँ
👉भारतीय जनता को एक राजनीतिक मंच प्रदान किया।
👉राष्ट्रीय आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप दिया।
👉स्वतंत्रता संग्राम के नेतृत्व में अहम भूमिका निभाई।
👉भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिलाने में मुख्य योगदान।
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निष्कर्ष
👉भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक रही। इसके जरिए भारतीयों ने अंग्रेज़ी शासन को चुनौती दी और स्वतंत्रता प्राप्त की।
📝 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन (50 MCQ प्रश्न-उत्तर)
1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब हुई थी?
A. 1888 ई.
B. 1889 ई.
C. 1890 ई.
D. 1885 ई.
2. कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन (1885) की अध्यक्षता किसने की थी?
A. दादा भाई नौरोजी
B. गोपाल कृष्ण गोखले
C. डब्ल्यू.सी. बनर्जी
D. बिपिन चंद्र पाल
3. किस अधिवेशन में पहली बार “स्वराज्य” को लक्ष्य घोषित किया गया?
A. 1905 – बनारस
B. 1907 – सूरत
C. 1906 – कलकत्ता
D. 1929 – लाहौर
4. 1907 के सूरत अधिवेशन में क्या हुआ था?
A. कांग्रेस और मुस्लिम लीग का समझौता
B. असहयोग आंदोलन की घोषणा
C. कांग्रेस का नरम दल और गरम दल में विभाजन
D. भारत छोड़ो आंदोलन
5. लखनऊ समझौता किस वर्ष हुआ था?
A. 1905
B. 1916
C. 1920
D. 1924
6. लखनऊ अधिवेशन (1916) की अध्यक्षता किसने की थी?
A. एनी बेसेंट
B. ए.सी. मजूमदार
C. बिपिन चंद्र पाल
D. लाला लाजपत राय
7. कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष कौन थीं?
A. सरोजिनी नायडू
B. एनी बेसेंट
C. विजयलक्ष्मी पंडित
D. इंदिरा गांधी
8. महात्मा गांधी ने केवल एक बार कांग्रेस की अध्यक्षता की थी, कब?
A. 1924 – बेलगाम
B. 1920 – नागपुर
C. 1931 – कराची
D. 1942 – बंबई
9. लाहौर अधिवेशन (1929) में क्या घोषित किया गया?
A. भारत छोड़ो आंदोलन
B. पूर्ण स्वराज्य का लक्ष्य
C. असहयोग आंदोलन
D. नागरिक अवज्ञा आंदोलन
10. कराची अधिवेशन (1931) में किस विषय पर प्रस्ताव पारित हुआ?
A. नागरिक अवज्ञा आंदोलन
B. भारत छोड़ो आंदोलन
C. मौलिक अधिकार और आर्थिक नीति
D. असहयोग आंदोलन
11. कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष कौन थीं?
A. एनी बेसेंट
B. सरोजिनी नायडू
C. विजयलक्ष्मी पंडित
D. सुचेता कृपलानी
12. कांग्रेस का द्वितीय अधिवेशन (1886) कहाँ हुआ था?
A. कोलकाता
B. बंबई
C. मद्रास
D. लखनऊ
13. कांग्रेस का तीसरा अधिवेशन (1887) किस शहर में हुआ?
A. नागपुर
B. मद्रास
C. बंबई
D. इलाहाबाद
14. 1889 का अधिवेशन किस शहर में हुआ?
A. नागपुर
B. पुणे
C. बंबई
D. लखनऊ
15. दादा भाई नौरोजी कांग्रेस के कितनी बार अध्यक्ष बने थे?
A. 1
B. 2
C. 3
D. 4
16. बाल गंगाधर तिलक पहली बार कांग्रेस में कब शामिल हुए?
A. 1885
B. 1890
C. 1895
D. 1907
17. कांग्रेस का 1905 का अधिवेशन कहाँ हुआ था?
A. पुणे
B. मद्रास
C. बनारस
D. लखनऊ
18. 1920 नागपुर अधिवेशन में क्या निर्णय लिया गया?
A. असहयोग आंदोलन समाप्त
B. असहयोग आंदोलन आरंभ
C. भारत छोड़ो आंदोलन
D. पूर्ण स्वराज्य
19. कांग्रेस का 1931 कराची अधिवेशन किसने अध्यक्षता की थी?
A. पंडित नेहरू
B. सरदार वल्लभ भाई पटेल
C. अबुल कलाम आज़ाद
D. राजेंद्र प्रसाद
20. 1938 का हरिपुरा अधिवेशन किसके नेतृत्व में हुआ था?
A. सुभाष चंद्र बोस
B. जवाहरलाल नेहरू
C. राजेंद्र प्रसाद
D. सरदार पटेल
21. त्रिपुरी अधिवेशन (1939) में अध्यक्ष कौन थे?
A. नेहरू
B. राजेंद्र प्रसाद
C. सुभाष चंद्र बोस
D. गांधी
22. 1942 में भारत छोड़ो प्रस्ताव कहाँ पारित हुआ था?
A. नागपुर
B. लखनऊ
C. इलाहाबाद
D. बंबई (मुंबई)
23. कांग्रेस का 1911 का अधिवेशन कहाँ हुआ?
A. पटना
B. कलकत्ता
C. मद्रास
D. बंबई
24. 1906 कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी?
A. दादा भाई नौरोजी
B. तिलक
C. दादा भाई नौरोजी
D. गोपाल गोखले
25. कांग्रेस का 1929 का अधिवेशन किस स्थान पर हुआ?
A. इलाहाबाद
B. लाहौर
C. कराची
D. नागपुर
26. कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन किस होटल में हुआ था?
A. ताज होटल
B. गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बंबई
C. मेट्रो होटल
D. मद्रास होटल
27. 1919 अमृतसर अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की?
A. गांधीजी
B. मोतीलाल नेहरू
C. मदन मोहन मालवीय
D. लाला लाजपत राय
28. किस अधिवेशन में “पूर्ण स्वराज्य दिवस” मनाने का निर्णय लिया गया?
A. नागपुर 1920
B. बेलगाम 1924
C. लाहौर 1929
D. कराची 1931
29. कांग्रेस का अंतिम अधिवेशन स्वतंत्र भारत में कब हुआ?
A. 1948
B. 1949 – जयपुर
C. 1950
D. 1951
30. किस अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार का निर्णय लिया?
A. 1907 – सूरत
B. 1920 – नागपुर
C. 1929 – लाहौर
D. 1931 – कराची
31. एनी बेसेंट किस वर्ष कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं?
A. 1915
B. 1917
C. 1920
D. 1922
32. सरोजिनी नायडू किस वर्ष कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं?
A. 1917
B. 1923
C. 1925 – कानपुर
D. 1929
33. 1919 का अधिवेशन किस जगह हुआ?
A. अमृतसर
B. लखनऊ
C. नागपुर
D. कलकत्ता
34. 1924 बेलगाम अधिवेशन में क्या हुआ?
A. कांग्रेस का विभाजन
B. गांधीजी ने अध्यक्षता की
C. असहयोग आंदोलन शुरू
D. भारत छोड़ो प्रस्ताव
35. 1934 बंबई अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की?
A. नेहरू
B. डॉ. राजेंद्र प्रसाद
C. गांधीजी
D. सुभाष बोस
36. किस अधिवेशन में समाजवादी विचारधारा को महत्व मिला?
A. नागपुर 1920
B. लखनऊ 1936 – नेहरू की अध्यक्षता
C. कराची 1931
D. सूरत 1907
37. किस अधिवेशन में अंग्रेज़ी हुकूमत से "सविनय अवज्ञा" का निर्णय लिया गया?
A. कराची 1931
B. बेलगाम 1924
C. लाहौर 1929
D. नागपुर 1920
38. सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से कब इस्तीफा दिया?
A. 1937
B. 1939
C. 1940
D. 1942
39. कांग्रेस का 1888 का अधिवेशन कहाँ हुआ?
A. इलाहाबाद
B. नागपुर
C. लखनऊ
D. पटना
40. कांग्रेस का 1890 अधिवेशन कहाँ हुआ?
A. लखनऊ
B. कलकत्ता
C. बंबई
D. मद्रास
41. कांग्रेस का 1923 अधिवेशन कहाँ हुआ?
A. पटना
B. काकीनाड़ा
C. लाहौर
D. कराची
42. कांग्रेस का 1895 अधिवेशन कहाँ हुआ था?
A. नागपुर
B. लखनऊ
C. पुणे
D. मद्रास
43. कांग्रेस का 1917 अधिवेशन कहाँ हुआ था?
A. लखनऊ
B. कलकत्ता
C. मद्रास
D. बंबई
44. कांग्रेस का 1927 अधिवेशन किस शहर में हुआ?
A. दिल्ली
B. मद्रास
C. इलाहाबाद
D. लखनऊ
45. कांग्रेस का 1936 का अधिवेशन किसके नेतृत्व में हुआ?
A. सुभाष बोस
B. गांधी
C. जवाहरलाल नेहरू – लखनऊ
D. सरदार पटेल
46. कांग्रेस का 1937 का अधिवेशन कहाँ हुआ?
A. फैजपुर
B. कराची
C. इलाहाबाद
D. लाहौर
47. कांग्रेस का 1940 अधिवेशन कहाँ हुआ?
A. बंबई
B. कलकत्ता
C. रामगढ़ (बिहार)
D. पटना
48. कांग्रेस का 1946 अधिवेशन कहाँ हुआ था?
A. दिल्ली
B. मेरठ
C. बंबई
D. लखनऊ
49. कांग्रेस का 1948 अधिवेशन कहाँ हुआ?
A. जयपुर
B. बंबई
C. इलाहाबाद
D. नागपुर
50. कांग्रेस का 1951 अधिवेशन कहाँ हुआ?
A. दिल्ली
B. नई दिल्ली – भारतीय गणराज्य बनने के बाद
C. पटना
D. भोपाल
📝 लघु उत्तरीय प्रश्न (Congress)
प्रश्न 1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?
👉 उत्तर – 28 दिसंबर 1885 को बंबई (मुंबई) में।
प्रश्न 2. कांग्रेस की स्थापना किसने की थी?
👉 उत्तर – ए.ओ. ह्यूम (एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम)।
प्रश्न 3. कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन के अध्यक्ष कौन थे?
👉 उत्तर – डब्ल्यू.सी. बनर्जी।
प्रश्न 4. कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष कौन थीं?
👉 उत्तर – एनी बेसेंट (1917, कलकत्ता अधिवेशन)।
प्रश्न 5. भारतीय महिला के रूप में पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष कौन बनीं?
👉 उत्तर – सरोजिनी नायडू (1925, कानपुर अधिवेशन)।
प्रश्न 6. लखनऊ समझौता कब हुआ था?
👉 उत्तर – 1916 ई. में।
प्रश्न 7. लाहौर अधिवेशन (1929) में क्या निर्णय लिया गया था?
👉 उत्तर – पूर्ण स्वराज्य को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया गया।
प्रश्न 8. गांधीजी ने किस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी?
👉 उत्तर – 1924 ई. में बेलगाम अधिवेशन की।
प्रश्न 9. कांग्रेस के किस अधिवेशन में नरम दल और गरम दल में विभाजन हुआ था?
👉 उत्तर – 1907, सूरत अधिवेशन।
प्रश्न 10. कराची अधिवेशन (1931) में कौन-सा प्रस्ताव पारित हुआ था?
👉 उत्तर – मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति का प्रस्ताव।
प्रश्न 11. कांग्रेस का लखनऊ अधिवेशन (1916) किसके लिए प्रसिद्ध है?
👉 उत्तर – कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौते के लिए।
प्रश्न 12. कांग्रेस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था?
👉 उत्तर – भारतीयों को एक राजनीतिक मंच पर एकजुट करना और सरकार तक अपनी मांग पहुँचाना।
प्रश्न 13. 1885 से 1905 तक कांग्रेस की राजनीति को किस नाम से जाना जाता है?
👉 उत्तर – नरमपंथी राजनीति।
प्रश्न 14. सूरत अधिवेशन (1907) का क्या परिणाम हुआ?
👉 उत्तर – कांग्रेस दो दलों में बँट गई – नरम दल और गरम दल।
प्रश्न 15. 1931 का कराची अधिवेशन किसकी अध्यक्षता में हुआ था?
👉 उत्तर – सरदार वल्लभभाई पटेल।
प्रश्न 16. “गरीबी हटाओ” का नारा किसने दिया था?
👉 उत्तर – इंदिरा गांधी ने।
प्रश्न 17. कांग्रेस के किस अधिवेशन में ‘असहयोग आंदोलन’ का प्रस्ताव पारित हुआ था?
👉 उत्तर – 1920, नागपुर अधिवेशन।
प्रश्न 18. कांग्रेस का कौन-सा अधिवेशन ऐतिहासिक ‘लाहौर प्रस्ताव’ के लिए प्रसिद्ध है?
👉 उत्तर – 1929 का लाहौर अधिवेशन।
प्रश्न 19. 1942 ई. में “भारत छोड़ो आंदोलन” का प्रस्ताव कहाँ पारित हुआ था?
👉 उत्तर – बंबई (मुंबई) में।
प्रश्न 20. कांग्रेस की स्थापना के समय वायसराय कौन था?
👉 उत्तर – लॉर्ड डफरिन।
📝 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Congress)
प्रश्न 1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कैसे और क्यों हुई थी? विस्तार से लिखिए।
👉 उत्तर – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को ए.ओ. ह्यूम ने बंबई में की। इसका उद्देश्य भारतीयों को एक राजनीतिक मंच पर लाकर उनकी समस्याओं और माँगों को ब्रिटिश सरकार तक पहुँचाना था। प्रारंभिक समय में कांग्रेस का स्वरूप नरमपंथी था। वह प्रार्थना, निवेदन और याचिका द्वारा सुधार चाहती थी। इसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रारंभिक चरण माना जाता है।
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प्रश्न 2. कांग्रेस में नरम दल और गरम दल के बीच मतभेद क्यों हुआ?
👉 उत्तर –
नरम दल (गोपालकृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता आदि) अंग्रेज़ों से प्रार्थना, निवेदन और सुधार की नीति अपनाते थे।गरम दल (बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय) तत्काल स्वराज्य और संघर्ष की नीति चाहते थे।
1907 के सूरत अधिवेशन में दोनों दलों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि कांग्रेस दो भागों में बँट गई। यह विभाजन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
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प्रश्न 3. कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन (1929) का महत्व बताइए।
👉 उत्तर –
लाहौर अधिवेशन 1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ। इसमें कांग्रेस ने “पूर्ण स्वराज्य” को अपना लक्ष्य घोषित किया।इस अधिवेशन में निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1930 को पूरे भारत में “स्वतंत्रता दिवस” मनाया जाएगा। इसी अधिवेशन से भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा और गति मिली।
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प्रश्न 4. कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता (1916) क्यों और कैसे हुआ?
👉 उत्तर –
1916 में लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता हुआ।
दोनों दलों ने मिलकर अंग्रेज़ सरकार से राजनीतिक सुधारों की माँग की।
इस समझौते से हिंदू-मुस्लिम एकता मजबूत हुई और स्वतंत्रता आंदोलन को नया बल मिला।
इसे “लखनऊ पैक्ट” कहा जाता है।
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प्रश्न 5. कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) का महत्व लिखिए।
👉 उत्तर – कराची अधिवेशन 1931 में सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में हुआ।
इस अधिवेशन में मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति का प्रस्ताव पारित किया गया।
इसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म
की स्वतंत्रता और शिक्षा का अधिकार देने की बात कही गई।
यह अधिवेशन भारतीय संविधान की आधारशिला माना जाता है।
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✨ विशेष तथ्य (Exam में अक्सर पूछे जाते हैं)
1. कांग्रेस का पहला अधिवेशन – 1885, बंबई।
2. कांग्रेस का विभाजन – 1907, सूरत।
3. पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव – 1929, लाहौर अधिवेशन।
4. कांग्रेस और मुस्लिम लीग का समझौता – 1916, लखनऊ।
5. भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव – 1942, बंबई।
6. स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री – पंडित जवाहरलाल नेहरू।
7. स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति – डॉ. राजेंद्र प्रसाद।
गुरुवार, 10 जुलाई 2025
10th(Matric) विज्ञान के 51 VVI प्रश्न उत्तर एग्जाम 2026 के लिए
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Class 10th Science All Chapter Subjective Question Physics Chemistry Biology
1.प्रकाश का अपवर्तन (परावर्तन) क्या है ?इसके नियमों को लिखे।
उत्तर -प्रकाश किरण जब एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछी प्रवेश करती है तो दोनों माध्यमों को अलग करने वाली सतह पर किरण मुड़ जाती है सघन माध्यम में आपतन बिंदु पर अभिलंब की ओर मुरती है जबकि विरल माध्यम में अभिलंब से दूर मुरती है इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं ।
अपवर्तन के नियम
1. आपतित किरण अपवर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब सभी एक ही तल में होते हैं ।
2. किन्ही दो माध्यम और प्रकाश के किसी निश्चित वर्ण के लिए आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात एक नियतांक होता है जो अपवर्तनांक कहलाता है इसे स्नेल का नियम भी कहते हैं।
2.दृष्टि दोष क्या है? यह कितने प्रकार का होता है?
उत्तर- जब किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब आँख की रेटिना पर स्पष्ट रूप से नहीं बनता है तो इस दोष को दृष्टि दोष कहते हैं। दृष्टि दोष मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं।
3.नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-नेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है, समंजन क्षमता कहलाती है। इसी के कारण नेत्र अल्पतम दूरी और दूर-बिंदु को नियोजित कर पाता है। सामान्य अवस्था में नेत्र की समंजन क्षमता 4 डायोप्टर होती है।
4.तारे क्यों टिमटिमाते हैं?
उत्तर- हवा की विभिन्न परतों में तापमान अलग-अलग होता है। इस कारण उसका धनत्व भी कम होता है। इसलिए तारों से आता प्रकाश इन वायु परतों में विभिन्न मात्रा में आवर्तित होता रहता है। अतः इस कारण तारे हमारे नेत्रों में टिमटिमाते प्रतीत होते हैं।
5.उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस कहते हैं क्यों?
उत्तर – उत्तल लेंस पर जब प्रकाश की समांतर किरणें आपतीत होती है तो लेंस से अपवर्तन के बाद यह समांतर किरणें एक बिंदु पर मिलती हैं इससे स्पष्ट होता है कि उत्तल लेंस समानांतर किराने किरणों को अभिसरी करता है इस गुण के कारण इसे अभिसारी लेंस कहते हैं।
6.विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव से संबंधित ‘दक्षिण हस्त- अंगूठा’ के नियम को लिखें।
उत्तर : यदि धारावाही तार को दाएँ हाथ की मुट्ठी में इस प्रकार पकड़ा जाए कि अँगूठा धारा की दिशा की ओर संकेत करता हो, तो हाथ की अन्य अँगुलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा व्यक्त करेंगी।
7.सरल सूक्ष्मदर्शी क्या है ?किरण आरेख खींचें।
उत्तर – सरल सूक्ष्मदर्शी वह युक्त है जिससे छोटे बिम्ब का आव्धित प्रतिबिंब प्राप्त किया जाता है । सरल सूक्ष्मदर्शी के रूप में एक उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है।
9.हम वाहनों के साइड मिलर के रूप में उत्तल दर्पण का उपयोग क्यों करते हैं?
उत्तर – उत्तल दर्पण का उपयोग सामान्य वाहनों के साइड मिरर के रूप में होता है इनमें ड्राइवर अपने पीछे के वाहनों को देख सकते हैं जिससे व सुरक्षित रूप से वाहन चला सके उत्तल दर्पण को इसलिए भी प्राथमिकता देते हैं क्योंकि यह सदैव सीधा प्रतिबिंब बनाते हैं लेकिन वह छोटा होता है इसका दृष्ट क्षेत्र भी बहुत अधिक है।
10.एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20cm है इसकी फोकस दूरी क्या होगी?
उत्तर – R=20cm,f=?
F=R/2
F = 20/2 = 10 cm Ans.
11.प्रतिरोध क्या है? इसका मान एवं मात्रक लिखें।
उत्तर—किसी धारावाही तार में आवेश के प्रवाह में जो रूकावट आती है उसे प्रतिरोध कहते हैं। इसका मात्रक ओम होता है।
12.विद्युत धारा को परिभाषित कर इसका मान एवं मात्रक लिखें।
उत्तर—इकाई समय में आवेश का प्रवाह विद्युत कहलाती है।
विद्युत धारा = आवेश/समय
इसका SI मात्रक एम्पियर (A) है।
14.किसी कार का अग्र दीप (हेडलाइट) किस दर्पण का उपयोग होता है?
उत्तर – किसी कार का अग्र दीप में अवतल दर्पण का बना होता है ।वाहनों के अग्र दीप में प्रकाश का शक्तिशाली समांतर किरण पुंज प्राप्त करने के लिए अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है।
15. किसी विद्युत परिपथ में लघुपथन कब होता है? अथवा, लघुपथन क्या है?
उत्तर- किसी विद्युत यंत्र में जब धारा कम प्रतिरोध से होकर प्रवाहित हो जाती है तो उसे लघुपथन कहते हैं। इस स्थिति में किसी परिपथ में विद्युत धारा अचानक बहुत अधिक हो जाती है। तब विद्युत पथ में विद्युन्मय तार उदासीन तार के संपर्क में आ जाती है जो प्रतिरोध के शून्य हो जाने के कारण ऐसा होता है। लघुपथन के कारण आग लग सकती है और विद्युत पथ में लगे उपकरण क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। छूने पर जोर का विद्युत आघात भी लग सकता है। इससे बचने के लिए विद्युत फ्यूज का प्रयोग किया जाना चाहिए।
16. कोई दो बल रेखाएँ आपस में एक-दूसरे को क्यों नहीं काटती हैं?
उत्तर—कोई दो बल रेखाएँ एक-दूसरे को नहीं काटती हैं। यदि वह काटे तो इसका तात्पर्य होगा कि कटान बिन्दु के उत्तरी ध्रुव पर लगा परिणामी बल दो दिशाओं में होगा जो कि असम्भव है।
17.ओम के नियम को लिखें।
उत्तर : अचर ताप पर किसी चालक से प्रवाहित धारा (i) चालक के सिरों के बीच के विभवांतर (V) के अनुक्रमानुपाती होता है। इसे ही ओम का नियम कहते हैं।
18.विद्युत् मोटर का क्या सिद्धांत है ?
उत्तर : जब किसी कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखकर उसमें धारा प्रवाहित की जाती है, तो कुंडली पर एक बल युग्म कार्य करने लगता है जो कुंडली को उसके अक्ष पर घुमाने का कार्य करता है।
19. चालक का प्रतिरोध किन किन बातों पर निर्भर करता है?
उत्तर- चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है- (i) चालक की प्रकृति पर कुछ चालक पदार्थ में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है और कुछ में कम। जैसे— ताँबा में लोहे की अपेक्षा कम प्रतिरोधक क्षमता होती है।
20. दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करतीं?
उत्तर – चुम्बकीय सूई सदा एक ही दिशा की ओर संकेत करती है। यदि दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करें तो इसका अर्थ होगा कि प्रतिच्छेद बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ हैं और दिक्सूची ने दो दिशाओं की ओर संकेत किया है, जो संभव नहीं है। इसलिए चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
21. विद्युत बल्ब में निष्क्रीय गैस भरी जाती है, क्यों?
उत्तर- निष्क्रिय गैस भरने से इसका टंग्स्टन तंतु नहीं जलता है। नाइट्रोजन, आर्गन इत्यादि निष्क्रिय गैस हैं। निष्क्रिय गैसों में तंतु का वाष्पीकरण नहीं हो पाता है अतः बल्ब की जीवन क्षमता बढ़ जाती है।
22.ऐसे दो ऊर्जा स्त्रोतों के नाम लिखिए जिन्हें आप नवीकरणीय मानते हैं।
उत्तर – वायु (पवन) और सागर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत हैं। इनका प्रयोग तब तक किया जा सकता है, जब तक सौर परिवार की परिस्थितियाँ समान बनी रहेंगी।
23. जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोया जाता है तो विलयन का रंग क्यों बदल जाता है?
उत्तर— जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोया जाता है तो वह हल्के हरे रंग का हो जाता है। यह कॉपर सल्फेट के घोल में से कॉपर को विस्थापित कर देता है।
Fe (s) आयरन + CuSO4 (aq) → FeSO4 (aq) + Cu (s) (कॉपर सल्फेट, नीला) आयरन सल्फेट (हल्का हरा) कॉपर
24. सोडियम को किरोसीन में डुबोकर क्यों रखा जाता है?
उत्तर— अत्यधिक क्रियाशील होने के कारण सोडियम धातु खुला रखने पर साधारण ताप पर ही ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर जलने लगती है। अतः यह जल न जाए इससे बचने के लिए इसे किरोसीन तेल में डुबाकर रखा जाता है।
25. उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? दो उदाहरण दें।
उत्तर—वह प्रक्रिया जिसमें कोई अम्ल किसी भस्म के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाता है, उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है।
– उदाहरण—अम्ल + भस्म लवण + जल
HCl + NaOH → NaCl + H2O
H2SO4 + 2KOH — K2SO4 + 2H2O
26. जल की अनुपस्थिति में अम्ल का व्यवहार अम्लीय क्यों नहीं होता है ?
उत्तर- जल किसी अम्ल के विच्छेदन में सहायक होता है जिससे हाइड्रोनियम (H3O+) आयन उत्पन्न होता है। जल की अनुपस्थिति में आयन उत्पन्न नहीं होते । इसलिए जल की अनुपस्थिति में अम्ल का व्यवहार अम्लीय नहीं होता।
27. विरंजक चूर्ण किस प्रकार तैयार किया जाता है?
उत्तर- विरंजक चूर्ण का निर्माण शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन की क्रिया से होता है।
Ca (OH)2 (s) + Cl2 (g) — CaOCl2 (s) + H2O (1)
बड़ी मात्रा मे इसके निर्माण के लिए एक विशेष टावर में हॉपर (Hopper) से शुष्क बुझा हुआ चूना डाला जाता है। नीचे से क्लोरीन गैस तथा गर्म वायु प्रवाहित करते हैं। क्लोरीन ऊपर तक पहुँचते-पहुँचते पूर्णतया अवशोषित हो जाती है और बुझा हुआ चूना विरंजक चूर्ण में बदल जाता है।
28.आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च क्यों होता है?
उत्तर- अंतर आयनिक आकर्षण के कारण, आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च होता है।
29. अयस्क और खनिज में क्या अन्तर है?
उत्तर—अयस्क — जिन पदार्थों (खनिजों) से धातु का निष्कर्षण सरल हो उन्हें अयस्क कहते हैं जैसे—ऐलुमिनियम का अयस्क बॉक्साइट है। खनिज — धातुओं के प्राकृत यौगिक रूप को खनिज कहते हैं। अधिकांश धातुएँ हमें खनिजों के रूप में ही प्राप्त होती हैं जैसे—ताँबा हमें पायराइट या क्यूपराइट से प्राप्त होता है।
30.मिश्रधातु किसे कहते हैं? मिश्रधातु बनाने के दो फायदे क्या हैं?
उत्तर – किसी धातु का अन्य धातु या अधातु के साथ मिलकर बना समांगी मिश्रण मिश्रधातु कहलाता है। जैसे— रोजमेटल, पीतल, स्टील, कांसा आदि । मिश्रधातु बनाने के फायदे — (i) संक्षारणरोधी। (ii) उपयोगिता बढ़ जाती हैं
31. क्या होता है, जब धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया करती हैं?
उत्तर-धातुएँ (क्रियाशील श्रेणी में ‘H’ से ऊपर) जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। कुछ धातु ठंडे जल के साथ तो कुछ भाप के साथ भी अभिक्रिया करती हैं।
32. उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होते हैं? दो उभयधर्मी ऑक्साइडों का उदाहरण दें। अथवा, उभयधर्मी ऑक्साइड का एक उदाहरण दें।
उत्तर—जो धातु ऑक्साइड अम्लीय और क्षारीय दोनों प्रकार के व्यवहार प्रकट करते हैं उन्हें उभयधर्मी कहते हैं।
उदाहरण- ऐलुमिनियम ऑक्साइड (Al2 O3), जिंक ऑक्साइड (ZnO).
33. लोहे को जंग से बचाने के लिए दो तरीके बताएँ ।
उत्तर—जंग से बचाने के तरीके इस प्रकार हैं-
(i) तेल या ग्रीस की परत लेपकर-यदि लोहे पर तेल या ग्रीस की स्तर जमा दें तो नम वायु लोहे के संपर्क में नहीं आ पातीं जिससे जंग नहीं लगता । मशीनों के पुर्जों पर ऐसा ही किया जाता है।
(ii) एनेमल से लोहे की सतह पर रंग-रोगन की स्तर जमाकर जंग पर नियंत्रण पाया जाता है। बसों, कारों, स्कूटर, मोटरसाइकिल, खिड़कियों, रेलगाड़ियों आदि पर एनेमल की स्तर जमाई जाती है।
34. समजातीय श्रेणी क्या है? सोदाहरण बताएँ। अथवा, अल्कोहल ग्रूप के तीन सदस्यों को उनके बढ़ते हुए कार्बन परमाणु के क्रम में सजाकर उनका अणुसूत्र एवं संरचना सूत्र लिखें।
उत्तर—यौगिकों की ऐसी शृंखला जिसमें कार्बन में स्थित हाइड्रोजन को एक ही प्रकार का प्रकार्यात्मक समूह प्रतिस्थापित करता है उसे समजातीय या सजातीय श्रेणी कहते हैं। इसके दो क्रमागत सदस्यों में CH2 ग्रुप का अन्तर होता है। जैसे—एल्केन, सजातीय श्रेणी का सामान्य सूत्र C2H2n + 2 है। इस श्रेणी के सदस्य मेथेन CH4. इथेन C2H6, प्रोपेन C3Hg, ब्यूटेन C4H10 एवं पेंटेन C1sH12 हैं।
35. मेंडलीफ की आवर्त सारणी की विसंगतियों को लिखें।
उत्तर- (i) H का स्थान नियत नहीं है। (ii) समस्थानिक का स्थान नियत नहीं है। (iii) कम परमाणु भार वाले तत्त्व के बाद अधिक परमाणु भार वाले तत्त्व को रखा गया है
36.पौधे हरे क्यों होते हैं?
क्लोरोफिल वर्णक की उपस्थिति के कारण पौधे हरे होते हैं।
37.हरे पौधों को उत्पादक क्यों कहते हैं?
पौधे कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल सूर्य प्रकाश तथा हरित लवक की सहायता से अपने तथा जीव जगत के दूसरों जीवो के लिए भोज पदार्थ का निर्माण करते हैं इसलिए उन्हें उत्पादक कहा जाता है।
38.पौधे में जलन खनिज लवणों के सवहन के लिए कौन सा उत्तक उत्तरदाई होते हैं अथवा पौधों में जल का परिवहन किस उत्तक से होता है?
उत्तर _पौधों में जाइलम से जल फ्लोयम से खनिज लवणों का सवहन होता है परसनी दाब का सहवन में महत्वपूर्ण होती है काफी ऊंचे पौधे में रसारोहण प्रक्रम द्वारा जल का परिवहन होता है।
39.उत्सर्जन की परिभाषा लिखिए?
उत्तर _शरीर के उपचायी क्रियाओं के परिणाम स्वरुप उत्पन् हानिकारक नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की क्रिया उत्सर्जन कहते हैं।
41.रक्त क्या है? इसके संगठन का वर्णन कार्य के साथ करें?
उत्तर _रक्त एक तरल सरल संयोजी उत्तक है रक्त का संगठन एंड कार्य इस प्रकार हैं रक्त के तरल भाग जिसे प्लाज्मा कहते हैं और इस में तैरते हुए कणों को कणिकाएं कहते हैं
लाल रक्त कणिका (R.B.C)-यह केंद्रक विभिन्न संरचना है इसमें हिमोग्लोबिन उपस्थित रहता है जिससे रक्त का लाल रंग दिखता है यह ऑक्सीजन एंड कार्बन डाइऑक्साइड का वाहक है।
श्वेत रक्त कणिका(W.B.C)- यह केंद्रीय रचना है या हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करती हैं।
पाटिटकाणु कोशिका- या छोटे गोल रचना है यह रक्त का थक्का बनाती हैं।
प्लाज्मा- यह रक्त का तरल भाग है इसमें विभिन्न घटक तैरते रहते हैं सीरम एक रुधिर प्लाज्मा है।
43.आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती हैं?
उत्तर_
अवटूग्रंथि को थायराक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन आवश्यक होता है हमारे शरीर में प्रोटीन और वसा के उपापचय को थायराक्सिन कार्बोहाइड्रेट नियंत्रित करता है यह वृद्धि संतुलन के लिए आवश्यक है यदि हमारे भोजन में आयोडीन की कमी रहेगी तो गर्दन या बाहर की ओर उभरे हुए नेत्र गोलक हो सकते हैं इस रोग से बचने तथा आयोडीन की शरीर में कमी दूर करने के लिए आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह दी जाती है।
44.हमारे आमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?
उत्तर—– अम्ल पाचन क्रिया सम्पादित करने में सहायता प्रदान करते हैं एवं भोजन के साथ आए कीटाणुओं को नष्ट करते हैं।
45. प्रकाश संश्लेषण क्या है? समीकरण लिखें।
उत्तर – सजीव जगत में हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वायुमंडल से CO2 ग्रहण कर और मिट्टी से खनिज लवण एवं जल अवशोषित कर पत्तियों में स्थित हरितलवक के सहारे ऊर्जादायक पदार्थों का निर्माण करते हैं। यह सम्पूर्ण प्रक्रिया प्रकाश संश्लेषण कहलाती है।
6CO2 + 6H2O प्रकाश/हरित लवक C6H1206 + 602
46. पादप हार्मोन किसे कहते हैं? चार पादप हार्मोन के नाम लिखें।
उत्तर – पौधों की वृद्धि और विभेदन क्रिया को सम्पन्न कराने वाले पदार्थों को पादप हार्मोन कहते हैं। जैसे—जिबरेलिन, ऑक्सिन, साइटोकाइनिन, एसेसिक अम्ल
47. पर परागण क्या है?
उत्तर—एक पुष्प के पराग कणों को दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचने की क्रिया को परपरागण कहते हैं।.
48. परागण किसे कहते हैं? उत्तर—पराग कणों का स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण या संचरण को परागण कहा जाता है।
49. पारितंत्र में अपमार्जकों का क्या महत्त्व या भूमिका है?
उत्तर — अपमार्जकों की उपस्थिति में जलीय सूक्ष्म जीवाणुओं का अपघटन सरलता से नहीं हो पाता जिससे वे जल में लंबे समय तक विद्यमान रहते हैं। परिणामस्वरूप जलीय जीवन प्रभावित होता है। फॉस्फेट युक्त अपमार्जक में शैवाल अत्यधिक वृद्धि करते हैं जिससे पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
50. पोषी स्तर क्या है?
उत्तर:— पोषी स्तर—आहार श्रृंखला का प्रत्येक चरण या कड़ी पोषी-स्तर कहलाता है।
51. पिट्यूटरी ग्रंथि को ‘मास्टर ग्रंथि’ क्यों कहा जाता है ?
उत्तर : पिट्यूटरी ग्रंथि कई अन्य महत्त्वपूर्ण अंतःस्रावी
ग्रंथियों के स्राव के समय एवं मात्रा का नियंत्रण करती है, इसलिए इस ग्रंथि को ‘मास्टर ग्रंथि’ कहते हैं।
Class 8th NCERT SCIENCE CHAPTER 1 फसल उत्पादन और प्रबंधन महत्वपूर्ण नोट्स
विज्ञान
अध्याय-1: फसल उत्पादन एवं प्रबंधन
कृषि पद्धतियाँ :- लगभग 10,000 ई.पू पहले हिम युग का अंत हुआ। बढ़ती हुई जनसंख्या को भोजन प्रदान करने के लिए हमें विशिष्ट पद्धति अपनाया होता है।
फसल:- जब एक ही किस्म के पौधे किसी स्थान पर बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं , तो इसे फसल कहते हैं। जैसे – अन्न , सब्जियाँ एवं फल।
फसल के प्रकार:- फसल को दो वर्गों में बँटा जा सकता है।
खरीफ़ फ़सल:- वर्षा ऋतु में लगाये जाने वाले फसलों को खरीफ फसल कहा जाता है। जैसे धान, मक्का, सोयाबीन, कपास आदि खरीफ फसलें हैं। भारत में वर्षा ऋतु सामान्यत: जून से सितम्बर तक होती है। अत: खरीफ के अंतर्गत वे फसलें आती हैं जिन्हें पानी की काफी आवश्यकता होती है।
रबी फ़सल:- वह फसल जिन्हें शीत ऋतु में बोया जाता है। भारत में शीत ऋतु अक्टूबर से मार्च तक होती है। गेंहूँ , चना , मटर , सरसों आदि।
कृषि पद्धतियाँ:- फसल उगाने के लिए किसान को अनेक क्रियाकलाप सामयिक अवधि में करने पड़ते हैं।
1. मिट्टी तैयार करना।
2. बुआई
3. खाद एवं उवर्रक देना
4. सिंचाई
5. खरपतवार से सुरक्षा
6. कटाई
7. भंडारण
1. मिट्टी तैयार करना:- इसमें किसान मिट्टी की जुताई करता है उसमें बहुत सारी कृषि औजारों का इस्तेमाल करता है पहले के समय में हल का इस्तेमाल आमतौर पर
किया जाता था इसमें एक लोहे की सॉफ्ट होती थी। आज के समय में मिट्टी कल्टीवेटर से तैयार की जाती है जो ट्रैक्टर से जुड़ा होता है।
बुआई:- इसमें किसान अच्छे बीजों का चयन करता है। बुवाई में भी किसान हलिया कल्टीवेटर का इस्तेमाल करता है इसकी मदद से बीजों को मिट्टी के अंदर मिला दिया जाता है। इसको आज के समय में सीड ड्रिल के नाम से जाना जाता है।
खाद एवं उवर्रक देना:- ऐसे पदार्थ ने मिट्टी में पोषक स्तर बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है उन्हें खाद और उर्वरक कहते हैं। खाद आमतौर पर हमें गोबर, मानव अपशिष्ट और पौधों के अवशेष के विघटन से प्राप्त होता है जबकि उर्वरक फैक्ट्रियों में तैयार किए जाते हैं। उर्वरक से मिट्टी को ह्यूमस नहीं मिलता जबकि खाद से मिट्टी को प्रचुर मात्रा में ह्यूमस मिलता है।
सिंचाई:- किसान पौधों को पानी देने के लिए बहुत सारे स्त्रोतों का इस्तेमाल करता है। इसे हम सिंचाई के नाम से जानते हैं। सिंचाई के मुख्य स्त्रोत कुएं, तालाब, ट्यूबवेल इत्यादि हैं।
सिंचाई की दो आधुनिक विधियां छिड़काव तंत्र और ड्रिप तंत्र है।
ड्रिप तंत्र:- इस विधि में जल बूँद - बूँद करके सीधे ही पौधे की जड़ों में जाता है। अतः इस विधि को ड्रिप तंत्र कहते हैं।
इस प्रकार की विधि का उपयोग फलदार पौधों, बगीचों एवं वृक्षों में किया जाता है। यह सिंचाई की सर्वोत्तम विधि है, जिसमे एक बूँद पानी भी व्यर्थ नहीं होता है।
छिड़काव तंत्र:- असमतल भूमि के लिए ऐसे स्थान पर जहाँ जल की मात्रा कम हो
इस विधि में सीधे पाइपों के ऊपर के सिरों पर घूमने वाले नोज़ल लगे होते है। सभी पाइप एक निश्चित दुरी पर मुख्य पाइप से जुड़े होते है। जब मुख्य पाइप में जल का प्रवाह किया जाता है तो वह छोटे पाइपों से होता हुआ घूमते हुए नोज़ल तक पहुँचता है और बाहर निकल जाता है। ये छिड़काव तंत्र ऐसा लगता है जैसे वर्षा, इस प्रकार का छिड़काव लॉन, कॉफ़ी की खेती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है
5. खरपतवार से सुरक्षा:- खेत में कुछ फसल के अलावा अवांछित पौधे उग आते हैं जिन्हें हम खरपतवार कहते हैं। खरपतवार हटाने की प्रक्रिया को निराई कहते हैं। हम कुछ रसायनों का प्रयोग भी खरपतवार को नियंत्रित करने में करते हैं जिन्हें खरपतवारनाशी के नाम से जाना जाता है।
खेत में कई अन्य अवांछित पौधों को खरपतवार कहते है। किसान खरपतवार हटाने के लिए कई तरीके अपनाता है, कुछ निम्न हैं-
हाथ से जड़ सहित तोड़कर या फसल उगने से पहले मिट्टी को तैयार करके।
खरपतवार हटाने का सर्वोत्तम समय उनमें पुष्पण एवं बीज बनने से पहले का होता है।
खरपतवार हटाने के लिए खुरपी या हैरो की सहायता ली जाती है।
खरपतवार को रसायनो की सहायता से भी हटाया जाता है, जिनमें 2, 4-D मुख्य खरपतवारनाशी हैं।
खरपतवारनाशी का प्रयोग करते समय मुँह और नाक पर कपड़ा लपेट लेना चाहिए।
निराई:- खरपतवार को हटाने को निराई कहते है।खेतों में निराई करना बहुत आवश्यक है क्योंकि फसल के साथ उगे अवांछित पौधे जल, पोषक, जगह एवं प्रकाश की स्पर्धा कर फसल
की वृद्धि पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं। फसल काटते समय भी ये बाधा उत्पन्न करते हैं। कुछ खरपतवार तो विषैले भी होते है, जो मनुष्य और पशुओं के लिए हानिकारक है।
रसायन:- खरपतवार पर नियंत्रण के लिए उपयोग किया जाता है। सायन विज्ञान की वह शाखा है जो भौतिक अवधारणाओं के आधार पर रासायनिक प्रणालियों में घटित होने वाली परिघटनाओं की व्याख्या करती है।
6. कटाई:- जब फसल तैयार हो जाती है तो उसको काटा जाता है जिसे हम कटाई कहते हैं। फसल काटने के लिए हम हार्वेस्टर का इस्तेमाल करते हैं। काटी गई फसल से भूसे और दानों को अलग कर लिया जाता है जिसे थ्रेशिंग के नाम से जाना जाता है।आधुनिक समय में काटने के लिए कंबाइन का इस्तेमाल किया जाता है।
फसलें पककर तैयार, खेतों में गेहूं की कटाई में जुटे किसान
हार्वेस्टर:- हार्वेस्टर मशीन की सहायता से भी फसल की कटाई की जाती है। इसके द्वारा कम समय और मेहनत में कटाई हो जाती है।
थ्रेशिंग:- काटी गई फसल से बीजों/दानों को भूसे से अलग करना, थ्रेशिंग कहलाता है।
थ्रेशिंग का काम कॉम्बाइन मशीन से किया जाता है। कॉम्बाइन मशीन हार्वेस्टर और थ्रेशर का सम्मिलित रूप है।
7. भंडारण:- फसल की प्राप्ति होने के बाद उसे सुरक्षित रख दिया जाता है जिसे हम भंडारण कहते हैं। भंडारण में हमें चूहे और कीटों से फसल की सुरक्षा करनी पड़ती है ताकि उसको खाने के लिए बचाया जा सके।
भंडारण के प्रकार:-
निजी भण्डार:- व्यापारी या विनिर्माता अपने माल के संग्रहण के लिए स्वयं भण्डारगृह रखते हैं और उसका संचालन करते है तो ऐसे भण्डारगृह निजी भण्डारगृह कहलाते हैं।
सार्वजनिक भण्डार:- यह एक स्वतंत्र इकाई होती हैं जिसमें किराया चुका कर कोई भी व्यक्ति अपने माल को इन भण्डार गृहों में रख सकता हैं।
सहकारी भंडारण:- इन भंडारणगृहों की स्थापना सहकारी समितियों द्वारा अपने सदस्यों के लाभ के लिए की जाती है। यह बहुत ही किफायती दर पर भंडारणण सुविधाएं प्रदान करते है।
भंडारण के कार्य:-
भंडारण बड़ी मात्रा में माल को गर्मी, सर्दी, आंधी, नमी से सुरक्षा प्रदान कर हानि को न्यूनतम करते हैं। भंडारण के कार्यो का वर्णन इस प्रकार किया जा सकता है-
वस्तुओं का भंडारणण:- भंडारणगृहों का मुख्य कार्य वस्तुओं को उस समय तक भली-भाँति संग्रहीत करना है जब तक उनके उपयोग, उपभेाग या उनकी बिक्री के लिए आवश्यकता न होगी।
वस्तुओं की सुरक्षा:- भंडारणगृह वस्तुओं को गर्मी धूल, हवा, नमी आदि के कारण खराब होने से बचाते हैं। इनके पास विभिन्न वस्तुओं के लिए उनकी प्रकृति के अनुसार संरक्षण की व्यवस्था होती है।
जोखिम उठाना:- भंडारणगृह में वस्तुओं को हानि अथवा क्षति का जोखिम भंडारणगृह अधिकारी को उठाना होता है। इसीलिए वह उनकी सुरक्षा के सभी उपाय करता है।
मूल्य जमा सेवाएं:- भण्डारगृह में कभी-कभी वस्तुओं का श्रेणीयन का कार्य किया जाता हैं जिससे उसकी पैकिंग व विक्रय में आसानी होती है।
बीजों को पीड़कों एवं सूक्ष्मजीवों से संरक्षित करने के लिए उचित भण्डारण आवश्यक है।
जुताई:- मिट्टी को उलटने-पलटने की प्रक्रिया जुताई कहलाती है। भूमि के उपरी परत को चीरकर, पलटकर या जोतकर उसे बुवाई या पौधा-रोपण के योग्य बनाना जुताई, भू-परिष्करण या कर्षण (tillage) कहलाती है। इस कृषिकार्य में भूमि को कुछ इंचों की गहराई तक खोदकर मिट्टी को पलट दिया जाता है, जिससे नीचे की मिट्टी ऊपर आ जाती है और वायु, पाला, वर्षा और सूर्य के प्रकाश तथा उष्मा आदि प्राकृतिक शक्तियों द्वारा प्रभावित होकर भुरभुरी हो जाती है।
हल:- प्रचीन काल जुताई के लिए हल का प्रयोग किया जाता था। हल एक कृषि यंत्र है जो जमीन की जुताई के काम आता है। इसकी सहायता से बीज बोने के पहले जमीन की आवश्यक तैयारी की जाती है। कृषि में प्रयुक्त औजारों में हल शायद सबसे प्राचीन है और जहाँ तक इतिहास की पहुँच है, हल किसी न किसी रूप में प्रचलित पाया गया है। हल से भूमि की उपरी सतह को उलट दिया जाता है जिससे नये पोषक तत्व उपर आ जाते हैं तथा खर-पतवार एवं फसलों की डंठल आदि जमीन में दब जाती है और धीरे-धीरे खाद में बदल जाते हैं। जुताई करने से जमीन में हवा का प्रवेश भी हो जाता है जिससे जमीन द्वारा पानी (नमी) बनाये रखने की शक्तबढ़ जाती है।
कुदाली:- जिसका उपयोग खरपतवार निकालने के लिए किया जाता है। कुदल , खेतीबारी में उपयोग आने वाला एक उपकरण है। इसकी सहायता से जमीन को खोदा जाता है। यह गड़्ढा खोदने, नाली बनाने, मिट्टी खोदने आदि के काम आती है। इसमें लोहे की बनी एक चौड़ी फाल (ब्लेड) होती है जिसके लम्बवत लकड़ी की बेंट (हत्था) लगा होता है।
कल्टीवेटर:- यह ट्रेक्टर से खींचे जाने वाला लोहे का बना यंत्र होता है, जिसमे कई हल जैसी आकृतियाँ लगी होती है। इसके उपयोग से समय और श्रम दोनों की बचत होती है।
बुआई:- बुआई फसल उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
परम्परागत औज़ार:- ये सिरे मिट्टी को भेदकर बीज को स्थापित कर देते हैं।
सीड-ड्रिल:- आजकल बुआई के लिए द्वारा संचालित सीड-ड्रिल का उपयोग होता है।
खाद एवं उवर्रक मिलाना:- मिट्टी में पोषक स्तर बनाए रखने खाद एवं उवर्रक मिलाया जाता है। कृषि में उपज बढ़ाने के लिए प्रयुक्त रसायन हैं जो पेड - पौधों की वृद्धि में सहायता के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। पानी में शीघ्र घुलने वाले ये रसायन मिट्टी में या पत्तियों पर छिड़काव करके प्रयुक्त किये जाते हैं। पौधे मिट्टी से जड़ों द्वारा एवं ऊपरी छिड़काव करने पर पत्तियों द्वारा उर्वरकों को अवशोषित कर लेते हैं। उर्वरक, पौधों के लिये आवश्यक तत्वों की तत्काल पूर्ति के साधन हैं लेकिन इनके प्रयोग के कुछ दुष्परिणाम भी हैं। ये लंबे समय तक मिट्टी में बने नहीं रहते हैं। सिंचाई के बाद जल के साथ ये रसायन जमीन के नीचे भौम जलस्तर तक पहुँचकर उसे दूषित करते हैं। मिट्टी में उपस्थित जीवाणुओं और सुक्ष्मजीवों के लिए भी ये घातक साबित होते हैं। इसलिए उर्वरक के विकल्प के रूप में जैविक खाद का प्रयोग तेजी से लोकप्रीय हो रहा है। भारत में रासायनिक खाद का सर्वाधिक प्रयोग पंजाब में होता है।इनका उपयोग हमें बहुत कम करना चाहिए।
कम्पोस्टिंग:- रसोई घर के अपशिष्ट सहित पौधों एवं जंतु अपशिष्टों को खाद में परिवर्तित करना कम्पोस्टिंग कहलाता है।
वर्मीकम्पोस्टिंग:- रसोइ घर के कचरे को कृमी अथवा लाल केंचुओं द्वारा कंपोस्ट में परिवर्तित करना वर्मीकम्पोस्टिंग कहलाता हैं।
सिंचाई:- निश्चित अंतराल पर खेत में जल देना।
सिंचाई के स्रोत:- कुऍं , तालाब , नदियाँ , बाँध आदि।
सिंचाई के परंपरागत स्रोत:- सिंचाई जल के कई स्रोत हैं, विभिन्न स्रोतों को निम्न दो वर्गों में बाँटा जा सकता है –
प्राथमिक स्रोत:-
द्वितीयक स्रोत:-
जल के प्राथमिक स्रोत:- प्राकृतिक रूप से जल तीन रुपों
जल
जल वाष्प तथा
बर्फ में पाया जाता है। मूल रूप से जल के स्त्रोत वर्षा व हिमपात हैं। वर्षा व हिमपात से प्राप्त जल की भौतिक स्थिति निरन्तर बदलती रहती है।
जल के द्वितीय स्रोत:- विभिन्न उद्देश्यों के लिये जल प्राप्त करने के मुख्य स्रोत द्वितीयक स्रोत ही हैं।
जलीय चक्र:- के विभिन्न चरणों से गुजरते हुये पानी विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होता है।
जल के इन स्रोतों को मोटे तौर पर दो वर्गों में बाँटा जा सकता है,
सतही स्रोत व सतही जल
भूमिगत स्त्रोत व भूमिगत जल
सतही स्रोत व सतही जल:- वर्षा व हिमपात से प्राप्त होने वाले जल का कुछ भाग वाष्पीकृत हो जाता है, कुछ भाग रिस कर नीचे चला जाता है और भूमिगत जल में मिल जाता है तथा शेष बड़ा भाग भूमि सतह के ऊपर रहता है जो सतही जल कहलाता है।
सतही जल के कई स्रोत हैं जिनमें से कुछ मुख्य निम्न हैं-
नदियाँ:-
नदियाँ सतही जल का सबसे बड़ा स्रोत है। वर्षा तथा बर्फ के पिघलने से प्राप्त होने वाला जल पृथ्वी की भौगोलिक स्थिति के अनुसार भू - क्षेत्र के निम्नतम स्तर पर एक धारा के रूप में बहता हुआ बढ़ता है। ऐसी नदियाँ मौसमी कहलाती हैं। इसके विपरीत कछ नदियों में जल वर्ष के हर समय उपलब्ध रहता है, हालांकि जल की मात्रा में पर्याप्त घटत - बढ़त होती रहती है।
तालाब:–
भूमि सतह पर प्राकृतिक अथवा कृत्रिम रूप से बने गडढों तथा निचले स्थानों में वर्षा का जल एकत्रित हो जाता है जिन्हें तालाब कहते हैं।इनमें जल की मात्रा बहत कम होती है। अत :
सिंचाई की दृष्टि से इनका महत्व नगण्य है। इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में केवल पशओं को नहलाने, पानी पिलाने अथवा कपड़े धोने जैसे कार्यों में प्रयोग किया जा सकता है।
झीलें:-
पहाड़ी क्षेत्रों में जहाँ भमि सतह अत्यन्त ऊँची नीची होती है, किन्हीं स्थानों पर तीव्र ढलान होता है तथा वह स्थान चारों ओर से ऊँचे स्थानों से घिरा होता है। ऐसा निचले स्थानो में वर्षा तथा झरनों का पानी एकत्रित हो जाता है जिससे झील का निर्माण हो जाता है। प्रकृति में कई बहुत बड़ी - बड़ी झीलें हैं। कुछ बहुत बड़ी झीलों का निर्माण भूकम्प के कारण जमीन के नीचे धंसने, के कारण भी हुआ है। बड़ी झीलें अपने क्षेत्र में जल आपूर्ति व सिंचाई के लिये एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं
भूमिगत पानी को ऊपर लाने की कई विधियाँ हैं जिनमें कुछ प्रमुख निम्न है –
कुऍं:- कूप निर्माण के लिये पृथ्वी सतह से जलग्राही परत तक एक बड़ा छिद्र बनाया जाता है जिसे कुआँ कहते हैं। कुएँ के ऊपर घिरनी लगा कर बाल्टियों से पानी प्राप्त किया जाता है।
नलकूप या ट्यूब वैल:- भूमिगत पानी प्राप्त करने का ये प्रमुख साधन है। और आजकल काफी बड़े पैमाने पर प्रयोग किये जाते हैं। घरेलू प्रयोग के लिये जल आपूर्ति, सिंचाई व औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति सभी के लिये नलकूप बहुत प्रचलित हैं। जिन स्थानों पर नहरें नहीं होती हैं, उन स्थानों में नलकूप ही सिंचाई का प्रमुख साधन
है।
पाताल तोड़ कुएँ:- प्रकृति में बहुत से ऐसे स्थान है जहा पाताल तोड़ कुओं के निर्माण की अनुकूल स्थितियाँ हैं।






